Katha

Karwa Chauth Katha- Karva Chauth Vrat Katha in Hindi English

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Written by Chagan

Karwa Chauth Katha, Karva Chauth Vrat Katha in Hindi, English :- Karva Chauth is one of the most celebrated festival throughout India and holds special significance in North India. It is the day when all married or few unmarried females fast whole day for the sake of long life of their beloved husbands, fiancé or boyfriends. In order to conclude the fasting of karwa Chauth a formal and years old karva chauth vrat katha is told among ladies while performing the desired rituals.

 

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When is Karwa Chauth in 2016?

October 19, 2016

This year Karwa Chauth 2016 would be celebrated on 19th Oct.

Karwa Chauth Katha, Karva Chauth Vrat katha in Hindi, English

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Karwa Chauth Katha in English

“A long long time ago, there lived a beautiful princess by the name of Veeravati. When she was of the marriageable age, Veeravati was married to a king. On the occasion of the first Karva Chauth after her marriage, she went to her parents’ house.”

“After sunrise, she observed a strict fast. However, the queen was too delicate and couldn’t stand the rigours of fasting. By evening, Veeravati was too weak, and fainted. Now, the queen had seven brothers who loved her dearly. They couldn’t stand the plight of their sister and decided to end her fast by deceiving her. They made a fire at the nearby hill and asked their sister to see the glow. They assured her that it was the moonlight and since the moon had risen, she could break her fast.”

“However, the moment the gullible queen ate her dinner, she received the news that her husband, the king, was dead. The queen was heartbroken and rushed to her husband’s palace. On the way, she met Lord Shiva and his consort, Goddess Parvati. Parvati informed her that the king had died because the queen had broken her fast by watching a false moon. However, when the queen asked her for forgiveness, the goddess granted her the boon that the king would be revived but would be ill.”

 

Karwa Chauth Katha in English

“When the queen reached the palace, she found the king lying unconscious with hundreds of needles inserted in his body. Each day, the queen managed to remove one needle from the king’s body. Next year, on the day of Karva Chauth, only one needle remained embedded in the body of the unconscious king.”

“The queen observed a strict fast that day and when she went to the market to buy the karva for the puja , her maid removed the remaining needle from the king’s body. The king regained consciousness, and mistook the maid for his queen. When the real queen returned to the palace, she was made to serve as a maid.”

“However, Veeravati was true to her faith and religiously observed the Karva Chauth vrat . Once when the king was going to some other kingdom, he asked the real queen (now turned maid) if she wanted anything. The queen asked for a pair of identical dolls. The king obliged and the queen kept singing a song ” Roli ki Goli ho gayi… Goli ki Roli ho gayi ” (the queen has turned into a maid and the maid has turned into a queen).”

“On being asked by the king as to why did she keep repeating that song, Veeravati narrated the entire story. The king repented and restored the queen to her royal status. It was only the queen’s devotion and her faith that won her husband’s affection and the blessings of Goddess Parvati.”

Karwa Chauth Katha in Hindi

Karwa Chauth Katha in Hindi Font

करवा चौथ की व्रत कथा

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बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।

Karwa Chauth Katha in Hindi Font

वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।

उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।

एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से ‘यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो’ ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।

इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह कर वह चली जाती है।

Karwa Chauth Katha in Hindi Font

सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा(Karva) उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा(Karva) उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा(Karva) नहीं छोड़ती है।

अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा(Karva) का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा(Karva) को अपना सुहाग वापस मिल जाता है।

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